कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में सीबीएसई छात्रों के लिए नया सवेरा: प्रवेश प्रक्रिया और नए अवसरों का संपूर्ण गाइड

Cambridge-India Centre for Advanced Studies (CAS) aims at focusing on innovation and research.

1. प्रस्तावना: वैश्विक शिक्षा में एक ऐतिहासिक मोड़

वैश्विक अकादमिक परिदृश्य में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जिन्हें ‘युगांतरकारी’ कहा जा सकता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, जो पिछले आठ सौ वर्षों से बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रकाश स्तंभ रहा है, उसका भारत के साथ एक नया और गहरा अध्याय शुरू करना ऐसा ही एक क्षण है। सदियों से भारतीय मेधा ने कैम्ब्रिज की गलियों में अपनी छाप छोड़ी है, लेकिन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों के लिए वहां पहुंचना हमेशा एक दुर्गम चुनौती रही है। अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों (जैसे IB या A-Levels) की अनिवार्यता ने कई प्रतिभाशाली भारतीय छात्रों के सपनों को सीमित कर दिया था।

आज हम एक ऐतिहासिक परिवर्तन के साक्षी बन रहे हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा सीबीएसई कक्षा 12 की योग्यता को औपचारिक मान्यता देना न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह भारत की उभरती ‘ज्ञान अर्थव्यवस्था’ (Knowledge Economy) को वैश्विक स्तर पर मिली सबसे बड़ी स्वीकृति है। एक वरिष्ठ शैक्षणिक परामर्शदाता के रूप में, मैं इसे भारत-यूके संबंधों में एक ऐसी रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखता हूँ, जहाँ सहयोग (Cooperation) अब दबाव (Coercion) से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। क्या भारतीय छात्र इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं? क्या हमारी शिक्षा प्रणाली अब वैश्विक मानकों के साथ सीधे संवाद के लिए तैयार है? आइए, इस नए सवेरे की हर बारीकी का विश्लेषण करें। 🎓

2. मुख्य समाचार: नेतृत्व में भारतीय प्रभाव और सीबीएसई की नई मान्यता

हाल ही में नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डेबोरा प्रेंटिस (Deborah Prentice) ने उस घोषणा की पुष्टि की जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय अब स्नातक (Undergraduate) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीबीएसई कक्षा 12 की योग्यता को स्वीकार करेगा। यह निर्णय विश्वविद्यालय की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह भारत की युवा और जीवंत प्रतिभाओं को अपने परिसर में आकर्षित करना चाहता है।

इस घोषणा का एक सबसे प्रभावशाली पहलू विश्वविद्यालय के नेतृत्व में दिख रहा भारतीय गौरव है। कैम्ब्रिज के 800 साल के गौरवशाली इतिहास में पहली बार, एक भारतीय—प्रोफेसर भास्कर वीरा (Professor Bhaskar Vira)—शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए ‘प्रो-वाइस-चांसलर’ (Pro-Vice-Chancellor) के पद पर आसीन हैं। प्रोफेसर वीरा, जिन्होंने हाल ही में प्रसिद्ध अभिनेत्री जीनत अमान के साथ भारत की पर्यावरणीय चुनौतियों पर ‘डिस्कवरी चैनल’ की श्रृंखला ‘एम्बर्स ऑफ होप’ (Embers of Hope) प्रस्तुत की थी, इस नए युग के सबसे सशक्त प्रतीक हैं। उनका शीर्ष नेतृत्व में होना यह सुनिश्चित करता है कि कैम्ब्रिज की नीतियां अब भारतीय वास्तविकताओं और आकांक्षाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

3. प्रवेश की शर्तें: सीबीएसई और ‘एडीशनल रिक्वायरमेंट्स’ का गणित

एक परामर्शदाता के रूप में मेरा यह कर्तव्य है कि मैं छात्रों को इस मान्यता की वास्तविकता से भी परिचित कराऊं। यद्यपि सीबीएसई का मार्ग खुल गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल बोर्ड परीक्षाओं के अंक आपको कैम्ब्रिज के ‘क्वाड’ (Quad) तक पहुंचा देंगे। कुलपति ने स्पष्ट रूप से ‘अतिरिक्त आवश्यकताओं’ (Additional Requirements) का उल्लेख किया है।

कैम्ब्रिज की शिक्षा पद्धति ‘ट्रिपोस’ (Tripos) प्रणाली पर आधारित है, जो विषय की गहन गहराई की मांग करती है। इसलिए, सीबीएसई पाठ्यक्रम की व्यापकता को संतुलित करने के लिए विश्वविद्यालय ने ‘सीबीएसई + अतिरिक्त योग्यता’ का मॉडल अपनाया है। यह मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि छात्र न केवल भारतीय बोर्ड में उत्कृष्ट हों, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेषज्ञता सिद्ध करें। यह प्रवेश प्रक्रिया अब अधिक ‘होल्स्टिक’ (सर्वांगीण) हो गई है, जहाँ आपकी अकादमिक प्रतिभा को कई पैमानों पर परखा जाएगा।

4. पात्रता मानदंड का सूक्ष्म विश्लेषण: “5-5-5” का अनिवार्य नियम

यदि आप एक सीबीएसई छात्र हैं और कैम्ब्रिज के स्नातक कार्यक्रमों का लक्ष्य बना रहे हैं, तो आपको अपनी तैयारी के केंद्र में “5-5-5” का नियम रखना होगा। यह कैम्ब्रिज में प्रवेश के लिए वर्तमान में सबसे ठोस पैमाना है।

प्रो-टिप और विश्लेषण: सीबीएसई कक्षा 12 के अंकों के साथ, छात्रों को निम्नलिखित मापदंडों को पूरा करना होगा:

  • 5 अतिरिक्त AP विषय: आपको कम से कम 5 एडवांस प्लेसमेंट (Advanced Placement) विषयों की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
  • स्कोर की आवश्यकता: प्रत्येक AP विषय में आपका स्कोर 5 (अधिकतम अंक) होना अनिवार्य है।

यह क्यों आवश्यक है? कैम्ब्रिज में इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा या अर्थशास्त्र जैसे विषयों के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को यह दिखाना होता है कि उन्होंने स्कूल स्तर के परे जाकर गहन शोध और अध्ययन किया है। AP स्कोर यह प्रमाणित करते हैं कि छात्र विश्वविद्यालय के अत्यंत प्रतिस्पर्धी और तीव्र गति वाले शैक्षणिक माहौल के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे केवल एक बाधा के रूप में न देखें, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के एक माध्यम के रूप में अपनाएं।

5. तुलनात्मक विश्लेषण: ऐतिहासिक बदलाव का चार्ट

यह तालिका दर्शाती है कि नई नीति ने भारतीय छात्रों के लिए किस प्रकार बाधाओं को कम किया है और नए आयाम जोड़े हैं:

मापदंडपुरानी स्थिति (Pre-2026)नई नीति के तहत लाभ (Post-2026)
प्रवेश का आधारमुख्य रूप से A-Levels या IB जैसे अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों पर निर्भरता।सीबीएसई कक्षा 12 की आधिकारिक और सीधी मान्यता।
पहुंच (Accessibility)केवल कुलीन अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के छात्रों तक सीमित।सामान्य सीबीएसई स्कूलों के मेधावी छात्रों के लिए वैश्विक द्वार।
वित्तीय सहायतासमर्पित भारतीय फंडिंग तंत्र का अभाव।‘कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन’ (Section 8) के माध्यम से सुलभ छात्रवृत्ति।
अनुसंधान और नवाचारव्यक्तिगत स्तर पर छिटपुट सहयोग।‘CAS’ के माध्यम से संस्थागत और दीर्घकालिक अनुसंधान साझेदारी।
सांस्कृतिक जुड़ावअकादमिक तक सीमित।खेल (क्रिकेट) और सांस्कृतिक कूटनीति का समावेश।

6. कैम्ब्रिज-इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (CAS) का शुभारंभ

कैम्ब्रिज केवल छात्रों को बुला ही नहीं रहा है, बल्कि वह स्वयं भारत में अपनी जड़ें गहरी कर रहा है। कैम्ब्रिज-इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (CAS) की स्थापना इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह केंद्र एक ‘बहु-स्थानिक’ (Multi-sited) और लचीला मंच है जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां संचालित करेगा।

इसे एक ‘अम्ब्रेला’ (Umbrella) मॉडल के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका अर्थ यह है कि यह केंद्र किसी एक भौतिक इमारत तक सीमित न रहकर, भारत और कैम्ब्रिज के बीच होने वाले तमाम द्विपक्षीय शोध, अकादमिक विनिमय और नीतिगत संवादों को एक छत के नीचे लाएगा। यह भारत की तीव्र गति से बढ़ती ज्ञान अर्थव्यवस्था और कैम्ब्रिज के वैश्विक नवाचार के बीच एक सेतु (Bridge) की भूमिका निभाएगा।

7. CAS के तीन मुख्य स्तंभ: एक विस्तृत विवरण

कैम्ब्रिज-इंडिया CAS की संरचना तीन सशक्त स्तंभों पर टिकी है, जिनमें से प्रत्येक का उद्देश्य भारतीय शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है:

  1. सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड सिंथेसिस (Centre for Advanced Research and Synthesis): यह विशुद्ध रूप से एक अनुसंधान संस्थान के रूप में कार्य करेगा। यहाँ कैम्ब्रिज और भारत के शीर्ष वैज्ञानिक और विद्वान संयुक्त रूप से जटिल वैश्विक समस्याओं पर शोध करेंगे। इसका उद्देश्य केवल सैद्धांतिक शोध नहीं, बल्कि ऐसा ‘सिंथेसिस’ (संश्लेषण) तैयार करना है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सके।
  2. नॉलेज-पॉलिसी-इनोवेशन हब (Knowledge-Policy-Innovation Hub): यह हब अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के समाधानों में बदलने का कार्य करेगा। यह शिक्षाविदों, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं के लिए एक ‘इनक्यूबेशन स्पेस’ होगा। उदाहरण के लिए, यदि कैम्ब्रिज में किसी नई तकनीक का आविष्कार होता है, तो यह हब सुनिश्चित करेगा कि उसे भारतीय संदर्भ में नीतिगत ढांचे और स्टार्टअप के माध्यम से कैसे लागू किया जाए।
  3. द लर्निंग हब (The Learning Hub): छात्रों और शिक्षकों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह छात्रवृत्ति, गतिशीलता कार्यक्रम और नवीन शैक्षिक कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
    • केस स्टडी: स्कूल ऑफ रियल एस्टेट: लर्निंग हब की पहली बड़ी पहलों में से एक P E Analytics Ltd के सहयोग से भारत के पहले ‘स्कूल ऑफ रियल एस्टेट’ की स्थापना है। इसमें कैम्ब्रिज के डिपार्टमेंट ऑफ लैंड इकोनॉमी (Department of Land Economy) द्वारा तकनीकी सहायता और पाठ्यक्रम सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यह दर्शाता है कि कैम्ब्रिज का ज्ञान अब भारत के व्यावसायिक क्षेत्रों को सीधे लाभान्वित कर रहा है।

8. कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन: परोपकारी वित्तपोषण और वित्तीय सुगमता

एक वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में, मैं जानता हूँ कि कैम्ब्रिज जैसे संस्थान में पढ़ाई का सबसे बड़ा अवरोध ट्यूशन फीस होती है। इसे दूर करने के लिए विश्वविद्यालय ने भारत में एक ‘धारा 8’ (Section 8) कंपनी के रूप में कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन (Cambridge India Research Foundation) की स्थापना की है।

धारा 8 कंपनी का महत्व: यह एक गैर-लाभकारी (Non-profit) इकाई है, जो अत्यधिक पारदर्शी होती है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारतीय दानदाताओं, पूर्व छात्रों (Alumni) और कॉर्पोरेट जगत से ‘परोपकारी फंडिंग’ (Philanthropic Funding) जुटाना है।

  • यह फाउंडेशन भारतीय कर कानूनों के अनुकूल है, जिससे भारतीय परोपकारी व्यक्तियों के लिए कैम्ब्रिज को दान देना आसान हो गया है।
  • यह धन सीधे तौर पर भारतीय छात्रों की ट्यूशन फीस, रहने के खर्च (Bursaries) और शोध परियोजनाओं के वित्तपोषण में उपयोग किया जाएगा। यह वित्तीय बाधाओं को तोड़ने की दिशा में एक ठोस संस्थागत प्रयास है। 💰

9. निवेश और लागत: वित्तीय नियोजन का यथार्थवादी चित्रण

कैम्ब्रिज में शिक्षा एक जीवन-परिवर्तनकारी निवेश है, लेकिन इसके लिए सटीक योजना की आवश्यकता होती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार लागत का विवरण इस प्रकार है:

  • ट्यूशन फीस: पाठ्यक्रम (जैसे इंजीनियरिंग बनाम आर्ट्स) और स्तर के आधार पर यह ₹27 लाख से ₹97 लाख प्रति वर्ष के बीच होती है।
  • अन्य खर्च: इसमें कॉलेज फीस, आवास और व्यक्तिगत खर्च शामिल हैं।

यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि नई फाउंडेशन के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्तियां जैसे बर्मिंघम विश्वविद्यालय की £12,500 की ‘फ्यूचर स्किल्स’ छात्रवृत्ति और ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय की पीजी मेरिट छात्रवृत्ति भी भारतीय मेधा के लिए प्रतिस्पर्धी विकल्प प्रदान कर रही हैं। कैम्ब्रिज का नया फाउंडेशन इसी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय छात्रों को अधिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

10. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ियाँ: रामानुजन से मार्क टली तक

कैम्ब्रिज और भारत का संबंध 150 वर्षों से भी अधिक समय से भावनाओं और बौद्धिकता से बुना हुआ है। कुलपति प्रोफेसर प्रेंटिस ने अपनी यात्रा के दौरान दिग्गज बीबीसी संवाददाता सर मार्क टली (Sir Mark Tully) को श्रद्धांजलि देकर इस रिश्ते की गहराई को रेखांकित किया। सर मार्क टली, जिन्होंने ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज से शिक्षा प्राप्त की थी, दशकों तक भारत और यूके के बीच एक सांस्कृतिक पुल बने रहे।

कैम्ब्रिज की विरासत उन दिग्गजों के बिना अधूरी है जिन्होंने आधुनिक भारत का निर्माण किया:

  • महान वैज्ञानिक: श्रीनिवास रामानुजन, जगदीश चंद्र बोस, एम.एस. स्वामीनाथन और जयंत नार्लीकर।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता: सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर, वेंकी रामकृष्णन और अमर्त्य सेन।
  • राष्ट्र निर्माता: जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी, मनमोहन सिंह, डॉ. शंकर दयाल शर्मा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस।
  • साहित्य और उद्योग: डॉ. हरिवंश राय बच्चन, सर सलमान रुश्दी, सर दोराबजी टाटा, युसूफ हामिद (सिप्ला) और लॉर्ड करण बिलिमोरिया (कोबरा बीयर)।

यह सूची केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास का प्रमाण है जो कैम्ब्रिज एक भारतीय छात्र में भर सकता है।

11. शिक्षा के साथ खेल: क्रिकेट कूटनीति का नया अध्याय

भारत और कैम्ब्रिज का रिश्ता केवल पुस्तकालयों तक सीमित नहीं है; यह क्रिकेट की पिच पर भी उतना ही जीवंत है। मार्च 2026 में, 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पुरुषों की क्रिकेट टीम भारत का दौरा करेगी। 🏏

इतना ही नहीं, समावेशिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए विश्वविद्यालय कैम्ब्रिज महिला क्रिकेट टीम को भी अगले साल भारत भेजने की योजना बना रहा है। इस खेल कूटनीति के पीछे एक महान विरासत है—क्रिकेट के जादूगर ‘रंजीतसिंहजी’ (Ranji) और उनके भतीजे दुलीपसिंहजी दोनों कैम्ब्रिज के छात्र (ट्रिनिटी कॉलेज) थे और उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए ‘ब्लूज’ (Blues) अर्जित किए थे। मई में लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला वार्षिक ‘ऑक्सफोर्ड-कैम्ब्रिज’ मैच इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा होगा, जहाँ भारतीय साझेदारों को आमंत्रित कर संबंधों को नया विस्तार दिया जाएगा।

12. विशेषज्ञों की राय: वैश्विक नेतृत्व का साझा दृष्टिकोण

इस ऐतिहासिक मोड़ पर वैश्विक नेतृत्व के विचार अत्यंत प्रेरणादायक हैं:

“मैं कैम्ब्रिज और भारत के बीच इन गहरे संबंधों को देखकर रोमांचित हूँ। कैम्ब्रिज-इंडिया CAS हमारे सर्वोत्तम शोधकर्ताओं को भारत की तेजी से विकसित होती ज्ञान अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने का एक अतुलनीय अवसर है।” — प्रोफेसर डेबोरा प्रेंटिस, कुलपति, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय

“शिक्षा ‘यूके-भारत विजन 2035’ के मूल में है। यह पहल वैश्विक प्रतिभाओं को निखारने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है और दोनों देशों के विश्व स्तरीय अनुसंधान को एक-दूसरे के और करीब लाती है।” — लिंडी कैमरन, भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त

13. छात्रों के लिए चेकलिस्ट: सफलता की रणनीति

एक सीबीएसई छात्र के रूप में कैम्ब्रिज की राह आसान बनाने के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान दें:

  • आधिकारिक अपडेट: ‘Select Your University’ और आधिकारिक कैम्ब्रिज पोर्टल पर सीबीएसई पात्रता मानदंडों की सूची पर कड़ी नजर रखें।
  • AP विषयों का चयन: 5 ऐसे AP विषयों का चयन करें जो आपके चुने हुए स्नातक पाठ्यक्रम के लिए प्रासंगिक हों। प्रत्येक में स्कोर ‘5’ का लक्ष्य रखें।
  • फाउंडेशन से जुड़ाव: ‘कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन’ की वेबसाइट पर जाकर छात्रवृत्ति और फंडिंग के अवसरों की विस्तृत जांच करें।
  • प्रोफाइल बिल्डिंग: कैम्ब्रिज केवल अंकों को नहीं, बल्कि ‘इंटलेक्चुअल क्युरियोसिटी’ (बौद्धिक जिज्ञासा) को देखता है। अपने शोध पत्र या नवाचारों को CAS के विजन के साथ जोड़ने का प्रयास करें।

14. यूके-भारत विजन 2035: भविष्य की तस्वीर

कैम्ब्रिज का यह कदम एक बड़ी रणनीतिक तस्वीर का हिस्सा है जिसे ‘यूके-भारत विजन 2035’ कहा जाता है। इसका लक्ष्य केवल छात्रों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक ऐसा साझा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जहाँ नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा दोनों देशों की सामूहिक प्रगति का इंजन बनें। शिक्षा यहाँ एक राजनयिक उपकरण (Diplomatic Instrument) के रूप में कार्य कर रही है, जो भविष्य के वैश्विक नेताओं को एक साझा मंच प्रदान करती है।

15. निष्कर्ष: एक उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा सीबीएसई को मान्यता देना भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक ‘स्वर्णिम अध्याय’ की शुरुआत है। यह कदम हमारी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता पर वैश्विक मुहर है। चाहे वह CAS के माध्यम से अनुसंधान की नई ऊंचाइयां हों या फाउंडेशन के माध्यम से वित्तीय सुगमता, कैम्ब्रिज अब भारतीय छात्रों के लिए पहले से कहीं अधिक निकट और सुलभ है।

प्रोफेसर भास्कर वीरा जैसे शीर्ष नेतृत्व और रामानुजन जैसी महान विरासत के साथ, अब जिम्मेदारी आपकी है। क्या आप इस ऐतिहासिक अवसर को भुनाने के लिए तैयार हैं? याद रखिए, कैम्ब्रिज केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की एक यात्रा है। क्या आप इस यात्रा के अगले यात्री बनेंगे?

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या कैम्ब्रिज अब सभी सीबीएसई छात्रों को स्वीकार करता है? विश्वविद्यालय ने सीबीएसई कक्षा 12 को कुछ विशिष्ट स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में मान्यता दी है। हालांकि, छात्रों को सीबीएसई अंकों के साथ अतिरिक्त आवश्यकताओं (जैसे AP स्कोर) को पूरा करना होगा।

2. प्रवेश के लिए अतिरिक्त परीक्षाओं की क्या भूमिका है? प्रवेश के लिए आमतौर पर 5 अतिरिक्त AP (Advanced Placement) विषयों में 5 का स्कोर होना अनिवार्य है। यह छात्र की गहरी विषय-विशेषज्ञता को प्रमाणित करता है।

3. कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन छात्रों की मदद कैसे करता है? यह एक ‘धारा 8’ कंपनी है जो परोपकारी दान के माध्यम से छात्रवृत्ति प्रदान करती है, शिक्षण शुल्क और रहने के खर्चों में सहायता करती है और अनुसंधान परियोजनाओं का समर्थन करती है।

4. कैम्ब्रिज में पढ़ाई का वार्षिक खर्च कितना है? भारतीय छात्रों के लिए ट्यूशन फीस प्रति वर्ष लगभग ₹27 लाख से ₹97 लाख के बीच होती है, जो पाठ्यक्रम और स्तर पर निर्भर करती है।

5. कैम्ब्रिज के सबसे प्रमुख भारतीय पूर्व छात्र कौन हैं? प्रसिद्ध पूर्व छात्रों में जवाहरलाल नेहरू, श्रीनिवास रामानुजन, अमर्त्य सेन, डॉ. मनमोहन सिंह, डॉ. हरिवंश राय बच्चन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्व शामिल हैं।

आधिकारिक संदर्भ और अधिसूचना: www.philanthropy.cam.ac.uk/how-to-give-to-cambridge/cambridge-india-research-foundation

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