क्या अंग्रेजी की चकाचौंध में हम अपनी जड़ें खो रहे हैं? भाषाई पदानुक्रम का संकट
1. प्रस्तावना: लंदन की एक शाम और विशाखापत्तनम की वो लड़की 📚 बीती शरद ऋतु में लंदन के केंद्र में […]
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शिक्षा की दुनिया में जब भी भाषा की बात आती है, तो अक्सर हमारा ध्यान ‘मानक’ और ‘शुद्ध’ भाषा की
आज के भारत में भाषा केवल संवाद का सेतु नहीं, बल्कि एक जटिल राजनीतिक कुरुक्षेत्र बन चुकी है। राज्यों के
✍️ परिचय: शब्दों की ताकत और डिग्रियों का भ्रम आज के दौर में जब हम ‘बौद्धिक’ होने की बात करते