भूमिका: भारत का ‘AI मोमेंट’ और वैश्विक उम्मीदें
डिजिटल इंडिया की कहानी अब एक नए और रोमांचक अध्याय में प्रवेश कर रही है। एक समय था जब भारत को केवल ‘दुनिया के बैक-ऑफिस’ के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं जहाँ हम वैश्विक तकनीकी मंच के मुख्य वास्तुकार बन रहे हैं। ‘India AI Impact Summit 2026’ केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास की गूँज है जो यह घोषणा करती है कि भविष्य की AI क्रांति का केंद्र अब भारत होगा। 🚀
यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण’ का जो सपना देखा गया था, वह अब ज़मीन पर उतर रहा है। जब दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और टेक-दिग्गज भारत मंडपम की सीढ़ियाँ चढ़ेंगे, तो वे केवल एक देश की प्रगति को नहीं देखेंगे, बल्कि वे मानवता के लिए AI के एक ‘नए और समावेशी मॉडल’ को देखेंगे। यह भारत का ‘AI मोमेंट’ है, जहाँ हम दुनिया की समस्याओं के लिए भारतीय समाधान पेश करने जा रहे हैं। ✨
इस भव्य आयोजन की तैयारी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही है; यह पूरे देश की आवाज़ को समेटे हुए है। शिलांग से लेकर तिरुवनंतपुरम तक और गांधीनगर से लेकर भोपाल तक, क्षेत्रीय सम्मेलनों ने इस विजन को हर भारतीय की आकांक्षाओं से जोड़ा है। आज, जब हम AI की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान केवल ‘कोड’ पर नहीं, बल्कि ‘करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव’ पर है। यही कारण है कि यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर एक नई उम्मीद जगा रहा है। 🇮🇳
विश्व का सबसे बड़ा AI शिखर सम्मेलन: एक विहंगम दृष्टि
16 से 20 फरवरी 2026 के बीच नई दिल्ली का ‘भारत मंडपम’ और ‘सुषमा स्वराज भवन’ दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों का संगम स्थल बनेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक युगांतरकारी घटना है। यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ का कोई देश इतने विशाल और भव्य स्तर पर वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो पश्चिमी देशों के तकनीकी एकाधिकार को एक सशक्त और न्यायसंगत चुनौती दे रहा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस आयोजन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि यह केवल अब तक का सबसे बड़ा AI सम्मेलन नहीं है, बल्कि यह सबसे अधिक ‘व्यवस्थित और परिणाम-उन्मुख’ आयोजन भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने AI ईकोसिस्टम को जिस तरह से परतों (Layers) में विकसित किया है, यह शिखर सम्मेलन उसी व्यवस्थित प्रगति का प्रमाण है। सम्मेलन के दौरान होने वाले संवाद और नवाचार यह तय करेंगे कि आने वाले दशकों में दुनिया AI का उपयोग कैसे करेगी।
भारत मंडपम में जुटने वाला है दुनिया का दिमाग: शिखर सम्मेलन के मुख्य आंकड़े
इस शिखर सम्मेलन की भव्यता को इसके आंकड़ों के माध्यम से बेहतर समझा जा सकता है। यह आयोजन किसी भी पिछले तकनीकी सम्मेलन की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और समावेशी होने जा रहा है।
| श्रेणी | विवरण/आंकड़े |
| प्रतिभागी राष्ट्र | 100+ |
| राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों की भागीदारी | 15+ (पुष्टि हो चुकी) |
| मंत्रियों की भागीदारी | 40+ |
| ग्लोबल CEOs और संस्थापकों की भागीदारी | 100+ |
| प्रसिद्ध शिक्षाविद और शोधकर्ता | 150+ (2 नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित) |
| प्रदर्शक (Exhibitors) और प्रदर्शनी बूथ | 840+ प्रदर्शक और 400+ बूथ |
| स्टार्टअप्स की भागीदारी | 450+ |
| आयोजित कार्यक्रम और सत्र | 500+ (5 दिनों में) |
| अपेक्षित प्रतिनिधि (Delegates) | 1,00,000+ (पंजीकरण जारी) |
| कुल प्रदर्शनी क्षेत्र | 70,000 वर्ग मीटर |
ग्लोबल साउथ की आवाज: तकनीक का लोकतंत्रीकरण
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन ने सम्मेलन के मुख्य एजेंडे को ‘तकनीक के लोकतंत्रीकरण’ (Democratization of Tech) के रूप में परिभाषित किया है। लंबे समय तक वैश्विक तकनीक पर कुछ ही शक्तिशाली देशों और सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों का कब्जा रहा है। लेकिन भारत का मानना है कि AI जैसी शक्तिशाली तकनीक का लाभ केवल मुट्ठी भर लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
ग्लोबल साउथ के लिए यह सम्मेलन एक मील का पत्थर है क्योंकि यह पहली बार उनकी विशिष्ट चुनौतियों—जैसे कृषि में सुधार, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा और समावेशी शिक्षा—को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला रहा है। भारत यहाँ एक ‘नॉलेज पार्टनर’ और ‘ब्रिज’ की भूमिका निभा रहा है, जो विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई को पाटने का काम करेगा। यह लोकतंत्रीकरण केवल भौगोलिक नहीं है, बल्कि संसाधनों तक पहुंच का भी है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि एक छोटा स्टार्टअप या एक विकासशील देश का छात्र भी उसी ‘कंप्यूट पावर’ और ‘डेटा सेट’ का उपयोग कर सके, जो दुनिया की बड़ी कंपनियों के पास उपलब्ध है।
अश्विनी वैष्णव का विजन: व्यवस्थित और परिनियोजन-केंद्रित विकास
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के AI ईकोसिस्टम को विकसित करने के लिए एक बहुत ही व्यवस्थित और सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल सॉफ्टवेयर विकसित करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि हम ‘AI समाधान’ (AI Solutions) देने वाली एक वैश्विक शक्ति बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन इनोवेटर्स के साथ समय बिताया है जो AI की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) पर काम कर रहे हैं।
वैष्णव के अनुसार, भारत का AI आर्किटेक्चर पांच रणनीतिक परतों (5 Layers) में विभाजित है:
- इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर: जहाँ जीपीयू (GPU) और डेटा सेंटर्स के लिए 70 बिलियन डॉलर का निवेश आ रहा है।
- डेटा लेयर: ‘AI कोश’ (AI Kosh) पर 7,000 से अधिक गैर-व्यक्तिगत डेटा सेट उपलब्ध कराए गए हैं।
- मॉडल लेयर: जहाँ भारत अपने ‘सॉवरेन मॉडल्स’ का बुके तैयार कर रहा है।
- एप्लिकेशन लेयर: जहाँ भारतीय आईटी कंपनियां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से हटकर सीधे समस्याओं का समाधान करने वाले AI ऐप्स बना रही हैं।
- गवर्नेंस लेयर: जो सुरक्षित और विश्वसनीय AI सुनिश्चित करती है।
यह व्यवस्थित बदलाव भारतीय आईटी जगत के लिए ‘री-स्किलिंग’ और ‘री-इमेजिनिंग’ का समय है, जहाँ हम दुनिया को यह दिखा रहे हैं कि AI को ज़मीन पर उतारकर उत्पादकता कैसे बढ़ाई जाती है।
द इम्पैक्ट एजेंडा: नेतृत्व के विचार और वैश्विक विजन
शिखर सम्मेलन की एक बड़ी उपलब्धि ‘The Impact Agenda: Leadership Reflections’ नामक एक विस्तृत संग्रह (Compendium) का लॉन्च है। केंद्रीय मंत्री ने इस दस्तावेज को जारी करते हुए बताया कि इसमें दुनिया के 60 सबसे प्रभावशाली उद्योग विशेषज्ञों और चिंतकों के विचार शामिल हैं। यह संग्रह केवल लेखों का संकलन नहीं है, बल्कि यह भविष्य का एक रोडमैप है जो बताता है कि AI किस तरह से समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक प्रभाव का माध्यम बन सकता है। इसमें ग्लोबल नॉर्थ की तकनीक और ग्लोबल साउथ की जरूरतों के बीच एक अद्भुत संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
AI के ‘सात चक्र’: प्रगति, लोग और ग्रह के लिए सूत्र
शिखर सम्मेलन की पूरी कार्ययोजना सात मुख्य विषयों या ‘चक्रों’ के इर्द-गिर्द बुनी गई है। ये सात चक्र भारत के ‘जन-भागीदारी’ और ‘सतत विकास’ के संकल्प को दर्शाते हैं।
आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई
यह चक्र इस बात पर केंद्रित है कि AI किस प्रकार उत्पादकता बढ़ाकर देश की जीडीपी में योगदान दे सकता है। इसका लक्ष्य केवल मुनाफ़ा कमाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि AI के माध्यम से गरीबी उन्मूलन, बेहतर आपदा प्रबंधन और न्यायसंगत विकास संभव हो सके।
संसाधनों तक पहुंच (Democratizing Access)
भारत का मानना है कि कंप्यूटिंग संसाधनों का केंद्रीकरण खतरनाक है। यह चक्र ग्लोबल साउथ के देशों और छोटे डेवलपर्स को उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेट, एल्गोरिदम और प्रोसेसिंग पावर तक समान पहुंच प्रदान करने के रोडमैप पर काम करता है।
सामाजिक सशक्तिकरण
तकनीक तब तक सफल नहीं है जब तक वह समाज के हाशिए पर रहने वाले व्यक्ति को सशक्त न करे। इसमें दिव्यांगों के लिए AI-आधारित सहायक उपकरण और भाषाई बाधाओं को दूर करने वाले मॉडल्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ‘भाषिणी’ जैसे प्रोजेक्ट्स इसी सोच का हिस्सा हैं।
सुरक्षित और विश्वसनीय AI
जैसे-जैसे तकनीक बढ़ रही है, ‘डीपफेक’ और गलत सूचनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। यह चक्र एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ढांचे की मांग करता है जहाँ AI सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह हो। भारत का DPDP कानून इस दिशा में एक मज़बूत आधार प्रदान करता है।
मानव पूंजी (Human Capital)
इसे ‘पाँचवीं औद्योगिक क्रांति’ (5th Industrial Revolution) के लिए कार्यबल को तैयार करने का सूत्र माना जा रहा है। इसमें केवल नई नौकरियां पैदा करना ही शामिल नहीं है, बल्कि ‘Human-in-the-loop’ दृष्टिकोण के साथ मौजूदा पेशेवरों को AI-सक्षम बनाना और उनकी दक्षता को दोगुना करना भी शामिल है।
विज्ञान के लिए AI
AI केवल चैट करने के लिए नहीं है, बल्कि यह कठिन वैज्ञानिक गुत्थियों को सुलझाने के लिए है। इस चक्र के तहत दवाओं की खोज (Drug Discovery), जलवायु मॉडल की भविष्यवाणी और अंतरिक्ष अनुसंधान में AI के क्रांतिकारी उपयोग पर चर्चा की जा रही है।
लचीलापन, नवाचार और दक्षता
यह ‘ग्रह’ (Planet) के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है। इसमें इस बात पर शोध किया जा रहा है कि कैसे AI का उपयोग करके ऊर्जा की खपत कम की जाए, जल प्रबंधन को बेहतर बनाया जाए और विकास को ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाए।
सेक्टर-विशिष्ट 200+ AI मॉडल्स की लॉन्चिंग: एक बड़ी छलांग
इस शिखर सम्मेलन का सबसे रोमांचक हिस्सा वह क्षण होगा जब भारत की अग्रणी आईटी कंपनियां 200 से अधिक ‘सेक्टर-विशिष्ट’ (Sector-specific) AI मॉडल्स लॉन्च करेंगी। ये मॉडल पश्चिमी देशों के विशाल भाषाई मॉडल्स (LLMs) की तरह केवल ‘सामान्य ज्ञान’ के लिए नहीं हैं, बल्कि ये ‘छोटे और सटीक’ मॉडल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये मॉडल विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा (बीमारी का निदान), कृषि (मिट्टी का स्वास्थ्य और फसल भविष्यवाणी), शासन (सरकारी सेवाओं की त्वरित डिलीवरी) और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार किए गए हैं। उद्योग जगत का यह ‘पिवट’ या बदलाव यह दर्शाता है कि भारत अब दुनिया को ‘AI सर्विस’ नहीं बल्कि ‘AI सॉलूशन्स’ बेच रहा है। इन छोटे मॉडल्स की खासियत यह है कि इन्हें चलाने के लिए बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत नहीं होती, जिससे ये छोटे उद्योगों के लिए भी किफायती बन जाते हैं।
निवेश का महासागर: 70 बिलियन डॉलर और भविष्य की संभावनाएं
भारत का AI बुनियादी ढांचा आज निवेश के लिए दुनिया का सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है। वर्तमान में लगभग 70 बिलियन डॉलर का निवेश AI इंफ्रास्ट्रक्चर की विभिन्न परतों में प्रवाहित हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने भविष्यवाणी की है कि शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले समझौतों और वैश्विक उत्साह को देखते हुए यह आंकड़ा सम्मेलन के अंत तक 140 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।
यह निवेश केवल जीपीयू खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें बड़े डेटा सेंटर्स का निर्माण, चिप डिजाइनिंग और सेमीकंडक्टर फैब यूनिट्स की स्थापना शामिल है। भारत की मज़बूत ग्रिड व्यवस्था और 50% नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रही है, क्योंकि वे अब अपने AI ऑपरेशंस के लिए ‘ग्रीन पावर’ की तलाश में हैं।
टैलेंट पाइपलाइन: 500 विश्वविद्यालयों तक AI की पहुंच
भारत की असली ताकत उसके 500 मिलियन से अधिक युवा हैं। सरकार ने इस टैलेंट को तराशने के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो पहले 5G और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सफल रहा है। जिस तरह देश में 100 ‘5G लैब्स’ स्थापित की गई थीं और 315 विश्वविद्यालयों को सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स दिए गए थे, अब उसी तर्ज पर 500 विश्वविद्यालयों को अत्याधुनिक AI बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाएगा।
इन विश्वविद्यालयों को केवल उपकरण ही नहीं, बल्कि उद्योग द्वारा तैयार किया गया (Industry-finalised) पाठ्यक्रम भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य किताबी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के बीच की दूरी को मिटाना है। उद्योग जगत सीधे तौर पर इन लैब्स के साथ जुड़ा होगा ताकि छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक वैश्विक समस्याओं पर काम कर सकें। यह पहल दुनिया के लिए सबसे बड़ी ‘AI टैलेंट पाइपलाइन’ तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
सॉवरेन एआई (Sovereign AI): भारत का अपना मॉडल
डिजिटल संप्रभुता के इस युग में, भारत अपना स्वयं का AI इकोसिस्टम विकसित कर रहा है जिसे ‘सॉवरेन एआई’ कहा जा रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत अपने ‘सॉवरेन मॉडल्स’ का एक पूरा गुलदस्ता (Bouquet) पेश करेगा। ये मॉडल्स केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि भारत की विविध भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों को गहराई से समझेंगे।
अश्विनी वैष्णव का विजन स्पष्ट है:
“हमारा उद्देश्य केवल AI का उपयोग करना नहीं है, बल्कि ऐसी AI शक्ति विकसित करना है जो भारत की विशिष्ट समस्याओं का समाधान करे और दुनिया को रास्ता दिखाए। हमारी संप्रभुता हमारे डेटा और हमारे द्वारा विकसित मॉडल्स में निहित है। हम अपनी शर्तों पर इस तकनीक का नेतृत्व करेंगे।”
ग्लोबल पार्टनरशिप और वैश्विक संस्थाओं की भागीदारी
यह सम्मेलन केवल सरकारों और कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी और शोध संस्थाएं भी इसमें ‘केस बुक्स’ और ‘फ्रेमवर्क्स’ के साथ शामिल हो रही हैं:
- ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन): कार्यबल के न्यायसंगत संक्रमण (Equitable Workforce Transition) के लिए एक ढांचा पेश करेगा।
- WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन): ग्लोबल साउथ में AI के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग पर एक विस्तृत रिपोर्ट साझा करेगा।
- World Bank (विश्व बैंक): कृषि के क्षेत्र में AI के क्रांतिकारी प्रभावों पर अपनी केस बुक जारी करेगा।
- UN Women: लैंगिक सशक्तिकरण और AI में महिलाओं की भागीदारी पर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
- International Energy Agency: टिकाऊ AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ऊर्जा मानकों पर काम करेगा।
इसके साथ ही, IIIT हैदराबाद द्वारा क्यूरेट किया गया ‘रिसर्च सिम्पोजियम’ भारत की शोध क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, जिसमें दुनिया भर से 250 से अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्राप्त हुए हैं।
दुनिया के दिग्गज एक मंच पर: Nvidia से Google तक
भारत मंडपम में जुटने वाली हस्तियों की सूची किसी भी वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए ईर्ष्या का विषय हो सकती है। टेक जगत के ‘दिग्गज’ भारत की क्षमता को पहचानने के लिए यहाँ मौजूद रहेंगे:
- Nvidia के Jensen Huang: जो कंप्यूटिंग के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
- Google के Sundar Pichai और Dennis Hassabis: जो AI और डीप लर्निंग के अगले चरण पर बात करेंगे।
- Microsoft के Brad Smith: जो वैश्विक गवर्नेंस और सुरक्षा पर विचार रखेंगे।
- OpenAI और Anthropic (Dario Amodei) के नेतृत्वकर्ता: जो जनरेटिव AI के सामाजिक प्रभाव पर चर्चा करेंगे।
- Bill Gates (Gates Foundation): जो सामाजिक भलाई के लिए AI के उपयोग को बढ़ावा देंगे।
भारतीय पक्ष से मुकेश अंबानी, एन. चंद्रशेखरन, नंदन नीलेकणि, सुनील मित्तल और रोशनी नादर मल्होत्रा जैसे नेतृत्वकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत का निजी क्षेत्र इस ‘AI क्रांति’ का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
युवा और महिलाएं: AI for All, AI by Her, और Yuva AI
भारत का AI मिशन केवल तकनीक के बारे में नहीं, बल्कि समावेशिता के बारे में है। ‘जन-भागीदारी’ के इस मॉडल को तीन बड़ी चुनौतियों के माध्यम से दुनिया के सामने रखा गया है:
AI for All: इसके तहत 1350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 21% अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। यह चुनौती उन समाधानों को पुरस्कृत करेगी जो स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में आम आदमी की मदद करते हैं।
AI by Her: महिलाओं के नेतृत्व वाले नवाचारों को समर्पित इस पहल को 800 से अधिक आवेदन मिले हैं। यह दर्शाता है कि भारत की बेटियां AI के निर्माण में पीछे नहीं हैं, बल्कि वे नेतृत्व कर रही हैं।
Yuva AI: 13 से 20 वर्ष के किशोरों के लिए शुरू की गई इस प्रतियोगिता ने 2500 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त की हैं। यह भारतीय युवाओं की उस ऊर्जा को दर्शाता है जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के सपने को साकार करेगी।
सुरक्षित और विश्वसनीय AI: नैतिक चिंताओं का समाधान
जैसे-जैसे AI समाज के हर हिस्से में फैल रहा है, ‘सुरक्षा और विश्वास’ सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत का रुख इस मामले में बहुत संतुलित है। शिखर सम्मेलन का एक पूरा स्तंभ ‘Safe and Trusted AI’ को समर्पित है। भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम ने पहले ही डेटा गोपनीयता के मानक तय कर दिए हैं।
सम्मेलन के दौरान इस बात पर वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी कि कैसे डीपफेक, एल्गोरिदम का पूर्वाग्रह (Bias) और गलत सूचनाओं को तकनीकी और कानूनी स्तर पर रोका जाए। भारत का मानना है कि ‘इनोवेशन’ और ‘रेगुलेशन’ के बीच एक ऐसा संतुलन होना चाहिए जो विकास की गति को कम किए बिना सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह सम्मेलन ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ की तरह ही AI गवर्नेंस के लिए एक वैश्विक साझा समझ विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
ऊर्जा की चुनौती: परमाणु शक्ति और टिकाऊ AI
AI के विकास का एक बड़ा संकट इसकी भारी ऊर्जा खपत है। डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए न केवल बिजली बल्कि भारी मात्रा में पानी की भी आवश्यकता होती है। भारत ने इस चुनौती को ‘परमाणु ऊर्जा’ (Nuclear Power) के माध्यम से हल करने का भविष्यवादी रोडमैप तैयार किया है।
अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया कि AI के लिए आवश्यक ‘स्थिर बेस-लोड’ (Stable Base-load) ऊर्जा के लिए परमाणु शक्ति एक अनिवार्य हिस्सा होगी। सरकार ने परमाणु क्षेत्र में बड़े सुधार किए हैं ताकि AI डेटा सेंटर्स को स्वच्छ और निरंतर बिजली मिल सके। इसके साथ ही, भारत की 50% नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता यह सुनिश्चित करेगी कि हमारा AI मिशन पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहे। यह ‘Planet’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम
India AI Impact Summit 2026 केवल पाँच दिनों की एक घटना नहीं है, बल्कि यह एक नए युग की शुरुआत है। भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों को एक साथ कैसे साधा जा सकता है। हम केवल एक ‘मार्केट’ नहीं हैं, बल्कि हम एक ‘इनोवेशन हब’ हैं जो पूरी दुनिया को रास्ता दिखाने की क्षमता रखता है।
जब 20 फरवरी 2026 को इस सम्मेलन का समापन होगा और ‘जीपीईआई (GPAI) काउंसिल’ की बैठक के साथ भविष्य के संकल्प लिए जाएंगे, तो दुनिया के पास AI का एक ऐसा मॉडल होगा जो केवल पश्चिम या पूर्व का नहीं, बल्कि ‘मानवता’ का होगा। भारत की यह यात्रा ‘सेवा’ से ‘समाधान’ तक की है, और हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अंत में, सवाल यह नहीं है कि AI भविष्य को कैसे बदलेगा, बल्कि सवाल यह है कि क्या दुनिया भारत द्वारा दिखाए गए इस ‘समावेशी और सुरक्षित’ रास्ते पर चलने के लिए तैयार है? क्योंकि भारत तो अपनी छलांग लगा चुका है! ✨
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
India AI Impact Summit 2026 की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला अब तक का सबसे बड़ा AI शिखर सम्मेलन है, जिसमें 100 से अधिक देश और 15 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष भाग ले रहे हैं। इसका मुख्य फोकस 200+ भारतीय AI मॉडल्स की लॉन्चिंग और तकनीक का लोकतंत्रीकरण है।
‘सॉवरेन एआई’ (Sovereign AI) भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? सॉवरेन एआई का अर्थ है कि भारत के पास अपनी डेटा संप्रभुता और अपने मॉडल्स हों। यह हमें विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और भारतीय भाषाओं एवं सांस्कृतिक संदर्भों के अनुसार समाधान विकसित करने में मदद करता है।
क्या इस सम्मेलन में युवाओं और महिलाओं के लिए विशेष अवसर हैं? हाँ, सम्मेलन में ‘AI by Her’ और ‘Yuva AI’ जैसी चुनौतियां शामिल हैं। साथ ही, 500 विश्वविद्यालयों को AI बुनियादी ढांचा और उद्योग-निर्धारित पाठ्यक्रम दिया जा रहा है ताकि युवाओं के लिए भविष्य का टैलेंट पाइपलाइन बनाया जा सके।
AI की ऊर्जा संबंधी चुनौतियों से भारत कैसे निपट रहा है? भारत अपनी 50% नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, AI डेटा सेंटर्स की विशाल मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) को एक महत्वपूर्ण ‘बेस-लोड’ ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शिखर सम्मेलन में कौन सी प्रमुख वैश्विक कंपनियां और संस्थाएं भाग ले रही हैं? इसमें Nvidia, Google, Microsoft, OpenAI और Adobe जैसी दिग्गज कंपनियां भाग ले रही हैं। साथ ही, WHO, ILO, विश्व बैंक और UN Women जैसी संस्थाएं AI के सामाजिक प्रभाव पर अपनी केस बुक्स और फ्रेमवर्क्स पेश करेंगी।
आधिकारिक संदर्भ (Official References)
- Circular Subject: Pre-summit Briefing and Milestones of India AI Impact Summit 2026.
- Ministry: Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY).
- Date: 30 January 2026.
- Source Reference: Press Information Bureau (PIB) / MeitY Official Communications / DD News.
Written by CBSERanker Team
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